मैं दिवानों का वेश लिए फिरता हूँ,मैं मदकता निःशेष लिए फिरता हूँ,जिसको सुनकर जग झूमे, झुके, लहराए,मैं मस्ती का संदेश लिए फिरता हूँ. 21वीं सदी की शुरुआत से हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में बुलंद रहने वाली आवाज… जिसके अल्फाज सीधा दिल पर दस्तक देते हैं, तो वहीं उस कलम के दिवाने आज भी हिन्दुस्तान की […]source https://hindiswaraj.com/harivansh-rai-bachchan-biography-in-hindi/?utm_source=rss&utm_medium=rss&utm_campaign=harivansh-rai-bachchan-biography-in-hindi
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